कैसे ?
Posted By सोनिया सिरसाट | 27 May 2013 19:29 IST
आना नहीं है जिसे, उस ग़म को मैं बुलाऊँ कैसे ?
हर पल चली आती खुशी को ठुकराऊँ कैसे ?
जब न रही कोई उम्मीद, नाउम्मीद मैं हो जाऊँ कैसे ?
रोशनी के समुंदर से, अँधेरे को ढुँढ़ लाऊँ कैसे ?
काँटे बन रहे हैं फूल, चुभन कोई मैं पाऊँ कैसे ?
दिल की ज़मीन पर, दर्द की चादर बिछाऊँ कैसे ?
बन गयी है ज़िन्दगी जन्नत, मातम मैं मनाऊँ कैसे ?
कितनी खूबसूरत है हक़ीक़त, ख्व़ाबों को समझाऊँ कैसे ?
